Sunday, April 28, 2013

गज़ल: कैसे उसने दिन गुजारे होंगे बहार में


कैसे उसने दिन गुजारे होंगे बहार में
किस तरह वो जीती होगी इंतज़ार में

मोहब्बत को पाने में देर अच्छी नहीं
लिखा हुआ था कल किसी इश्तेहार में

आईना देखने की भी अब हिम्मत नहीं
कुछ इस तरह टूटा हूँ मैं तेरे प्यार में

उसने फूलों की डाली कांधों पे रख दी
मैं ही खड़ा रह गया था एक कतार में

पाक नज़रों से देखा औ लब मिल गए
इस तरह लो हो गई इबादत मजार में 

2 comments:

Mohit Tomar said...

bahut ache the sir ji

Mohit Tomar said...

bahut ache the sir ji

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

Copyright © 2012;

इस वेबसाइट पर लिखित समस्त सामग्री अनन्त भारद्वाज द्वारा कॉपीराइट है| बिना लिखित अनुमति के किसी भी लेख का पूर्ण या आंशिक रूप से प्रयोग वर्जित है|