Monday, April 08, 2013

गज़ल: यारों वो खुश अदा है खुश लिबास है


यारों वो खुश अदा है खुश लिबास है
यूँ तो है वो दूर खड़ी पर मेरे पास है

न तो अभी प्यार किया है न झगड़ा
क्यूँ लगता है मेरी वजह से उदास है

कहीं तुम भी न उसे चाहने लग जाओ
इसी डर से कह दिया बड़ी बकवास है

पुरानी सल्तनत तो अब भी जिंदा है
मैं दीवाने आम हूँ वो दीवाने खास है

चाँद भी मेरे लिए अब किवाड़ खोलेगा
कोई तुमसा आएगा दिल को आस है

सबके साथ हैं हँसते अकेले में रोते हैं
तब खुश थी ये जिंदगी अब उदास है

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