Thursday, July 04, 2013

गज़ल: खेल खत्म हो चुका तो होश में आओ

 मुन्तज़िर फिरोज़ाबादी

खेल खत्म हो चुका तो होश में आओ
यारों अब तो चराग अक्ल के जलाओ

सुना है शहर के सभी मैखाने बंद है
जानशीं ज़रा अपनी आँखों से पिलाओ

साथ साथ चलने का वादा तय हुआ है
ये हाथ तो मेरा है तुम अपना बढ़ाओ

इश्क के चर्चे दोनों के घर पहुँच गए
अब तो कोई निकाह की बात चलाओ

क्या हमीं निभाते रहें रिश्ते उम्र भर
अब थोडा रिश्ते-दिल तुम भी निभाओ

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